एमएमयू वर्कर यूनियन और प्रबंधन के बीच चल रहे विवाद को लेकर श्रम अधिकारी सोलन के समक्ष धारा 2(क) के तहत समझौता वार्ता आयोजित की गई। वार्ता में एआईटीयूसी हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी के सचिव अतुल चंद्र भारद्वाज और एमएमयू वर्कर यूनियन की प्रधान उमा शर्मा ने कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं को उठाया।

अतुल चंद्र भारद्वाज ने आरोप लगाया कि अप्रैल 2026 में कर्मचारियों द्वारा यूनियन गठित कर मांग पत्र सौंपने के बाद से प्रबंधन का रवैया कर्मचारियों के प्रति उचित नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया और वेतन रोकने की स्थिति भी बनी। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1100 पर शिकायत के बाद श्रम निरीक्षक संतराम के हस्तक्षेप से जुलाई का वेतन दिलवाया गया, लेकिन इसके बाद 100 से अधिक कर्मचारियों की हाजिरी बंद कर दी गई। उन्होंने कहा कि अगस्त का वेतन भी लंबित है।

गौरतलब है कि यह विवाद कई महीनों से चल रहा है। इससे पहले कर्मचारी दो माह से वेतन न मिलने के आरोप में हड़ताल पर जा चुके हैं, इसके बाद आंदोलन नौवें दिन भी जारी रहा था, और हाल ही में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का धरना 20वें दिन भी जारी रहने की खबर आई थी।

यूनियन प्रधान उमा शर्मा ने कहा कि कई कर्मचारी 15-15 वर्षों से संस्थान में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को नौकरी छोड़कर नए ठेकेदार के साथ जुड़ने के लिए कहा जा रहा है। ऐसे में कर्मचारियों की वरिष्ठता और ग्रेच्युटी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने ठेकेदार धर्मेंद्र सिंह धैया के लाइसेंस और दस्तावेजों की जांच की मांग भी उठाई।

भारद्वाज ने आरोप लगाया कि कर्मचारी वर्षों से बारहमासी प्रकृति के कार्य कर रहे हैं और ऐसे कार्यों को ठेके पर देने की व्यवस्था की श्रम विभाग द्वारा जांच होनी चाहिए। यूनियन ने पहचान पत्र, छुट्टियों का समाधान, वरिष्ठता के आधार पर वेतन और सैलरी स्लिप देने की मांग की है।

उमा शर्मा ने बताया कि काम बंद होने के 22 दिनों के दौरान कर्मचारियों के सामने बच्चों की फीस, किराया और राशन जुटाने की समस्या खड़ी हो गई है। यूनियन ने सेवा निरंतर रखने और कर्मचारियों को पंजीकृत करने की मांग की।

वार्ता के दौरान श्रम विभाग कार्यालय परिसर में पुलिस बल की तैनाती पर भी एआईटीयूसी ने आपत्ति जताई। भारद्वाज ने कहा कि यूनियन अनुशासित तरीके से अपनी मांगें उठा रही है और प्रशासन को मामले का समाधान कानून के अनुसार करना चाहिए।

संबंधित खबरें:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

google.com, pub-5060528529274269, DIRECT, f08c47fec0942fa0