एमएमयू के कर्मचारियों और मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर शुरू किया गया आंदोलन नौवें दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन देने के लिए अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी के सचिव अतुल चंद्र भारद्वाज, कॉमरेड अनूप प्राशर और दिलीप कंवर आंदोलन स्थल पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कर्मचारियों से बातचीत कर आंदोलन की आगामी रणनीति पर चर्चा की।
अतुल चंद्र भारद्वाज ने आरोप लगाया कि एमएमयू प्रबंधन का रवैया कर्मचारियों के प्रति तानाशाहीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन अपने कर्मचारियों और मजदूरों से बातचीत करने के बजाय अड़ियल रवैया अपना रहा है। उनका आरोप है कि कर्मचारियों से पहले इस्तीफा देने की मांग की जा रही है और उसके बाद ही बकाया वेतन देने की बात कही जा रही है। भारद्वाज ने इसे श्रम कानूनों के विपरीत बताते हुए कर्मचारियों को उनका वेतन दिलाने की मांग की।
उन्होंने एमएमयू में कथित ठेका प्रथा पर भी सवाल उठाए। भारद्वाज ने कहा कि कई कर्मचारी वर्षों से संस्थान में काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी सेवाओं को ठेकेदारों के माध्यम से दर्शाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि समय-समय पर बदलने वाले ठेकेदारों के पास कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट के तहत आवश्यक वैध लाइसेंस भी नहीं हैं।
कर्मचारियों ने बताया कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। बच्चों की स्कूल फीस, मकान का किराया और रोजमर्रा के राशन का खर्च उठाना भी मुश्किल हो गया है।
भारद्वाज ने प्रदेश सरकार और श्रम विभाग से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर कर्मचारियों का बकाया वेतन दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कर्मचारियों की मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को प्रशासन के खिलाफ भी तेज किया जाएगा। साथ ही उन्होंने आम जनता से कर्मचारियों के संघर्ष में समर्थन देने की अपील की। BITE – अतुल चंद्र भारद्वाज सचिव अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी