हिमाचल प्रदेश में इस बार प्रतिकूल मौसम और जलवायु परिवर्तन का असर सेब की पैदावार, आकार और गुणवत्ता पर साफ दिखाई दे रहा है। शिमला जिला के कोटखाई के निगान निवासी सेब बागवान देवेंद्र चौहान ने बताया कि पिछले एक-दो दिनों से मंडी में सेब के दामों में कुछ गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि उनके 65 पेटी प्लैंड रॉयल सेब का लॉट 2600 रुपये प्रति पेटी के हिसाब से बिका। उनके अनुसार यही माल दो दिन पहले बिकता तो करीब 3000 से 3100 रुपये प्रति पेटी तक दाम मिलने की संभावना थी। फिलहाल मंडी में बेहतर माल का अधिकतम भाव 2700 से 2800 रुपये प्रति पेटी के आसपास चल रहा है।
देवेंद्र चौहान ने बताया कि इस साल मौसम की अनिश्चितता और बदलते जलवायु प्रभाव के कारण सेब में अपेक्षित साइज, रंग और गुणवत्ता नहीं बन पाई। इसका सीधा असर बागवानों की आमदनी पर पड़ रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कुल फसल करीब 40 प्रतिशत ही रह गई है। उन्होंने बताया कि निचले क्षेत्रों में उत्पादन केवल 10 से 15 प्रतिशत, जबकि मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 30 से 40 प्रतिशत तक रह गया है। अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है।
चौहान के अनुमान के मुताबिक इस वर्ष प्रदेश में सेब का कुल उत्पादन करीब एक करोड़ 20 लाख से एक करोड़ 30 लाख पेटी के बीच सिमट सकता है। कम आवक के बावजूद बाजार में सेब की बिक्री हो रही है, लेकिन गुणवत्ता और साइज अपेक्षित नहीं होने के कारण बागवानों को लागत के अनुरूप लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने बताया कि बागवानों के बीच सेब की नई किस्मों को लेकर भी रुझान बढ़ रहा है। प्लैंड रॉयल और जीरीदार किस्मों के साथ गोल्डन और ग्रेनी स्मिथ का इस्तेमाल पोलिनेशन के लिए किया जा रहा है। वहीं पिछले एक-दो वर्षों में गाला किस्म की मांग में तेजी आई है। बाजार में बदलते रुझान को देखते हुए बागवान भी नई किस्मों की ओर रुख कर रहे हैं।
सोलन : मौसम की मार से हिमाचल में सेब उत्पादन 40 फीसदी तक सिमटा, बाजार के उतार-चढ़ाव से बागवान चिंतित