हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में टमाटर उत्पादक किसान इन दिनों भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ग्राम पंचायत शामती के किसान ठाकुर रामलाल ने बताया कि टमाटर की खेती अब किसानों के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है। बढ़ती उत्पादन लागत और मंडियों में कम दाम मिलने से किसानों की कमर टूट चुकी है।
ठाकुर रामलाल ने बताया कि चार बीघे में तैयार टमाटर की फसल पर दवाइयों, कीटनाशकों और अन्य कृषि कार्यों पर करीब ₹80 हजार तक खर्च आ जाता है, लेकिन मंडियों में टमाटर मात्र ₹300 से ₹400 प्रति क्रेट के भाव बिक रहा है। ऐसे में किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। मजदूरी और परिवहन का खर्च भी किसानों को अपनी जेब से उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बी-ग्रेड टमाटर की खरीद और टमाटर से सॉस बनाने के लिए परियोजना शुरू करने का आश्वासन दिया था, ताकि किसानों को कम से कम ₹7 प्रति किलो का मूल्य मिल सके, लेकिन अब तक यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है। वहीं बाहरी राज्यों, विशेषकर बेंगलुरु से आने वाले टमाटर के कारण स्थानीय किसानों को उचित दाम नहीं मिल रहे हैं।
रामलाल ने कहा कि लगातार हो रहे नुकसान के चलते कई किसान अब टमाटर की खेती से दूरी बनाने लगे हैं। हालांकि लहसुन, बीन और शिमला मिर्च जैसी फसलों से कुछ राहत मिल रही है, लेकिन मुख्य फसल टमाटर में नुकसान ने किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर कर दी है। उन्होंने सरकार से किसानों के हित में ठोस कदम उठाने और उचित बाजार व प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।