अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आवंटित विकास निधि के संरक्षण तथा इसे अन्य कार्यों में डायवर्ट होने से रोकने के लिए कानून बनाने की मांग उठाई गई है। इस मांग को लेकर कोऑर्डिनेशन कमेटी के जिला संयोजक विनोद कुमार की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने उपमंडल अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
विनोद कुमार ने कहा कि ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य एससी-एसटी वर्ग के विकास के लिए आवंटित धनराशि को सुरक्षित करने के लिए ठोस कानूनी प्रावधान करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में फिलहाल ऐसा कोई प्रभावी कानून नहीं है, जिसके कारण इस वर्ग के लिए निर्धारित बजट को अन्य कार्यों में खर्च किए जाने की आशंका बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि एससी-एसटी वर्ग के विकास के लिए बजट में निर्धारित धनराशि का इस्तेमाल उसी वर्ग के कल्याण और विकास कार्यों पर होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में आवंटित राशि का अपेक्षित लाभ लक्षित वर्ग तक नहीं पहुंच पा रहा है।
विनोद कुमार ने बताया कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना सहित कई राज्यों में एससी-एसटी विकास निधि के संरक्षण के लिए कानून बनाया जा चुका है। इन राज्यों में स्थानीय निकायों, नगर निगमों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से निर्धारित राशि को संबंधित वर्ग के विकास पर खर्च करना अनिवार्य किया गया है।
उन्होंने दावा किया कि हिमाचल में ठोस कानूनी प्रावधान के अभाव में एससी-एसटी वर्ग के लिए निर्धारित धनराशि का दो प्रतिशत हिस्सा भी वास्तविक कल्याण कार्यों पर खर्च नहीं हो पाता और राशि अन्य मदों में चली जाती है। उन्होंने सरकार से हिमाचल में भी इसी तर्ज पर कानून बनाने की मांग की।
विनोद कुमार ने कहा कि इसी मांग को लेकर प्रदेशभर में उपमंडल अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से जल्द ठोस कदम उठाकर विकास निधि का लाभ लक्षित वर्ग तक सुनिश्चित करने की मांग की।
सोलन : एससी-एसटी विकास निधि के संरक्षण के लिए कानून बनाने की मांग, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन