शिमला जिले के कोटखाई क्षेत्र के थाना गांव निवासी बागवान डॉ. विक्रांत वर्मा ने सोलन की एसएफटी सेब मंडी में पहली बार अपना सेब बेचकर बेहतर अनुभव हासिल किया। पिछले सात-आठ वर्षों से विभिन्न सेब मंडियों में अपनी फसल बेच रहे डॉ. वर्मा इस बार पहली बार सोलन मंडी पहुंचे। उन्होंने मंडी में मिले दाम और कारोबार की प्रक्रिया को लेकर संतोष जताया।
डॉ. विक्रांत वर्मा के अनुसार सोलन मंडी में उन्हें उनकी उम्मीद के अनुरूप सेब का अच्छा भाव मिला। उनके पास करीब 60 पेटी सेब का एक लॉट था। इस लॉट में सेब का आकार अपेक्षाकृत छोटा था, इसके बावजूद उन्हें 250 रुपये का भाव मिला। उन्होंने कहा कि सेब के आकार को देखते हुए यह दाम उनके लिए संतोषजनक और उचित रहा।
उन्होंने बताया कि इस बार उन्होंने सेब की कोई विशेष या हाई ग्रेडिंग नहीं करवाई थी, बल्कि सामान्य ग्रेडिंग के आधार पर ही फसल मंडी में लाई गई थी। उनका मानना है कि सेब का भाव उसकी वास्तविक गुणवत्ता के आधार पर ही निर्धारित होना चाहिए। केवल वजन बढ़ाने के उद्देश्य से हाई ग्रेडिंग करने से हमेशा बेहतर कीमत मिलना जरूरी नहीं है। गुणवत्ता अच्छी होने पर सामान्य ग्रेडिंग में भी बागवान को उचित दाम मिल सकता है।
डॉ. वर्मा ने इस सीजन में बागवानों के सामने आ रही चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सबसे बड़ी समस्या सेब के आकार को लेकर सामने आ रही है। कई बगीचों में सेब का साइज छोटा रह गया है। जिन बगीचों में फसल अधिक लगी है, वहां यह समस्या और गंभीर हो गई है, जिससे बागवानों को उत्पादन और बेहतर बाजार भाव हासिल करने में परेशानी हो रही है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि सेब पर दाग-धब्बे और अन्य रोगों की समस्या को समय रहते उचित दवाइयों और आवश्यक स्प्रे के माध्यम से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने सोलन मंडी में अपने पहले अनुभव को सकारात्मक बताते हुए कहा कि यहां मिले भाव ने उन्हें उत्साहित किया है।
सोलन मंडी में सेब के दाम से बागवान खुश, पहली बार मंडी पहुंचे डॉ. विक्रांत वर्मा का अनुभव रहा शानदार