सोलन क्षेत्र में टमाटर की खेती करने वाले किसानों को इस सीजन बाजार में उचित दाम नहीं मिलने के कारण आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। डांगरी पंचायत के किसान जोगिंदर शर्मा ने बताया कि इस वर्ष क्षेत्र में टमाटर की फसल का उत्पादन ठीक रहा, लेकिन बाजार में बाहरी राज्यों से बड़ी मात्रा में टमाटर की आवक होने के कारण स्थानीय किसानों को उनकी उपज का अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पाया। कई किसानों के लिए स्थिति ऐसी रही कि टमाटर के दाम बेहद कम स्तर तक पहुंच गए।
जोगिंदर शर्मा ने बताया कि टमाटर की खेती में किसानों को शुरुआत से ही काफी खर्च करना पड़ता है। उन्होंने स्वयं करीब 5,000 टमाटर के पौधे लगाए थे। बीज, पौध तैयार करने और अन्य कृषि कार्यों पर होने वाले खर्च को अलग रखें तो केवल फसल में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों और कीटनाशकों पर ही करीब एक लाख रुपये खर्च हो गए। इसके बावजूद जब फसल तैयार हुई तो बाजार में उचित दाम नहीं मिलने के कारण लागत निकालना भी मुश्किल हो गया।
किसानों के अनुसार टमाटर की खेती में मौसम की अनिश्चितता भी जोखिम बढ़ा रही है। एक ओर उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर बाजार में दामों में अचानक गिरावट आने से किसानों को अपनी मेहनत का उचित प्रतिफल नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में केवल एक ही फसल पर निर्भर रहना किसानों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है।
जोगिंदर शर्मा ने बताया कि इस स्थिति को देखते हुए अब किसान फसल विविधीकरण पर जोर देने की योजना बना रहे हैं। भविष्य में केवल टमाटर की खेती पर निर्भर रहने के बजाय लहसुन, बीन्स और अन्य सब्जियों की खेती भी की जाएगी। इस वर्ष बीन्स की फसल का अनुभव अपेक्षाकृत अच्छा रहा है, जिसके चलते किसानों का रुझान अन्य फसलों की ओर बढ़ा है। किसानों का कहना है कि अलग-अलग फसलों की खेती करने से बाजार भाव में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कुछ हद तक कम किया जा सकता है और खेती से होने वाली आय को अधिक संतुलित बनाया जा सकता है।