डिजिटल इंडिया और पारदर्शी व्यवस्था के बड़े-बड़े दावों के बीच सोलन से सामने आया एक मामला पूरे फास्टैग सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि सोलन सब्जी मंडी में खड़ा एक टेंपो बिना सनवारा टोल प्लाजा पहुंचे ही टोल टैक्स का भुगतान कर बैठा। चालक के मोबाइल पर जैसे ही टोल कटने का संदेश आया, वह खुद दंग रह गया। सवाल यह है कि जब वाहन अपनी जगह से हिला तक नहीं, तो आखिर टोल किस आधार पर काट लिया गया? क्या अब फास्टैग तकनीक इतनी लापरवाह हो चुकी है कि वाहन सड़क पर निकले बिना ही उसकी जेब से पैसे निकाले जा सकते हैं?
मामले ने वाहन चालकों में रोष पैदा कर दिया है। टेंपो मालिक ने साफ कहा कि एनएचएआई ऐसे मामलों में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं करती और प्रदेश सरकार को इस पूरे मामले का कड़ा संज्ञान लेना चाहिए। उनका कहना है कि यदि एक खड़े वाहन से टोल वसूला जा सकता है तो हजारों अन्य वाहन चालक भी ऐसी “अदृश्य वसूली” का शिकार हो सकते हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए डिजिटल सिस्टम में यदि वाहन की वास्तविक लोकेशन और टोल क्रॉसिंग का सही रिकॉर्ड नहीं रखा जा सकता, तो आम जनता आखिर इस व्यवस्था पर भरोसा कैसे करे? यह केवल एक टेंपो का मामला नहीं, बल्कि उस सिस्टम की पोल खोलता है जो सुविधा के नाम पर लोगों की जेब पर डाका डालने के आरोप झेल रहा है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग जवाबदेही तय करते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा।