सोलन में टमाटर उत्पादन से जुड़े किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। धरोट पंचायत के किसान एवं पूर्व प्रधान रणबीर ठाकुर ने टमाटर की खेती में बढ़ती लागत, महंगी दवाइयों और मंडी में मिल रहे कम दाम को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसानों के लिए टमाटर की खेती करना मुश्किल होता जा रहा है।
रणबीर ठाकुर के अनुसार टमाटर उत्पादन में बीज, खाद, दवाइयों, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। महंगी कीटनाशक दवाइयों के कारण किसानों की लागत बढ़ रही है। वहीं, मंडी में फसल का अपेक्षित मूल्य नहीं मिलने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों का कोई मजबूत संगठन नहीं होने के कारण उनकी समस्याएं प्रभावी ढंग से सामने नहीं आ पा रही हैं।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष मंडी में ए-ग्रेड टमाटर के दाम करीब 100 से 150 रुपये से लेकर 250 से 400 रुपये तक रहे, जबकि बी-ग्रेड टमाटर 50, 80 और 100 रुपये तक में बिक रहा है। किसानों के अनुसार इन दामों में उत्पादन लागत निकालना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
रणबीर ठाकुर ने कहा कि टमाटर के साथ अदरक और मटर जैसी पारंपरिक फसलों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि पहले किसान बड़ी मात्रा में अदरक मंडी पहुंचाते थे, लेकिन अब कई क्षेत्रों में घरेलू जरूरत के मुताबिक उत्पादन भी नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि सोलन मंडी से सरकार को करीब 400 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। मंडी की पूरी व्यवस्था किसानों, आढ़तियों, कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़ी है, इसलिए किसानों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना जरूरी है।
रणबीर ठाकुर ने कहा कि यदि उत्पादन लागत और मंडी में फसल के दाम के बीच संतुलन नहीं बना तथा किसानों को आवश्यक सहयोग नहीं मिला, तो अगले वर्ष सोलन में टमाटर का उत्पादन और कम हो सकता है।