केंद्र सरकार की मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई अब जिले में बेसहारा पशुओं, विशेषकर कुत्तों के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनकर उभर रही है। पशुपालन विभाग की डॉ. जयमाला ने बताया कि यह सेवा शुरुआत में गाय, भैंस, बकरी, घोड़े और खच्चरों जैसे पशुओं के उपचार के लिए शुरू की गई थी, लेकिन अब इसमें स्ट्रे डॉग्स के इलाज को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि सोलन में यह सुविधा पिछले दो वर्षों से संचालित है और अब तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। पूर्व में दवाइयों की कुछ कमी थी, जिसे अब दूर कर लिया गया है और वर्तमान में पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध हैं। यह सेवा पूरी तरह निशुल्क है, जिसके तहत पशुपालकों या आम नागरिकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
पशुओं के उपचार के लिए सरकार ने 1962 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जिस पर संपर्क कर मोबाइल यूनिट को बुलाया जा सकता है। यह सेवा प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक उपलब्ध रहती है, जबकि आपातकालीन परिस्थितियों में टीम देर शाम तक भी कार्य करती है ताकि लंबित मामलों का निपटारा किया जा सके।
वर्तमान में यह इकाई सोलन, कंडाघाट और धर्मपुर उपमंडलों में सेवाएं दे रही है। डॉ. जयमाला ने पालतू पशु मालिकों से अपील की है कि वे अपने पालतू जानवरों को उपचार के लिए नजदीकी पशु चिकित्सालय या पॉली क्लिनिक ले जाएं, ताकि मोबाइल यूनिट का अधिकतम उपयोग बेसहारा पशुओं के लिए हो सके। उन्होंने कहा कि टीम प्रतिदिन सीमित मामलों को ही देख पाती है, ऐसे में सहयोग और धैर्य आवश्यक है।