सोलन जिला स्वास्थ्य अधिकारी अमित रंजन ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि आज का युवा तेजी से नशे की दलदल में फंसता जा रहा है। उन्होंने बताया कि नशे की शुरुआत अक्सर पीयर प्रेशर यानी दोस्तों के दबाव से होती है। स्कूल और कॉलेजों में कई युवा अपने दोस्तों के बीच खुद को साबित करने या ग्रुप में जगह बनाने के लिए शराब, तंबाकू या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन शुरू कर देते हैं। इसके अलावा असफलता, तनाव, प्रेम संबंधों में टूटन और जिज्ञासा भी युवाओं को इस रास्ते पर ले जाती है।
स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि शराब और तंबाकू को गेटवे ड्रग्स माना जाता है, क्योंकि इन्हीं से नशे की शुरुआत होती है और धीरे-धीरे यह आदत हार्ड ड्रग्स तक पहुंच जाती है। नशे का असर शरीर और दिमाग दोनों पर पड़ता है। नशा छोड़ने पर हाथ-पैर कांपना, उल्टी, बेचैनी, नींद न आना और शरीर में दर्द जैसे लक्षण सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति का भविष्य, पढ़ाई, करियर और पारिवारिक जीवन बर्बाद कर देता है। युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि तनाव से निपटने के लिए योग, व्यायाम, संगीत और सकारात्मक गतिविधियों को अपनाएं तथा नशे से दूर रहें।