धारों की धार क्षेत्र में टमाटर उत्पादक किसान इन दिनों फसल के उचित दाम नहीं मिलने से परेशान हैं। क्षेत्र के किसान प्रेम सिंह (प्रेमचंद) ने बताया कि मौजूदा समय में मंडी में टमाटर 10 से 15 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है। ऐसे में किसानों के लिए फसल की उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। मंडी तक टमाटर पहुंचाने में ही करीब एक रुपये प्रति किलो का भाड़ा खर्च हो रहा है।
प्रेम सिंह ने बताया कि टमाटर की खेती में किसानों को शुरुआत से ही काफी खर्च करना पड़ता है। फसल को बीमारियों और कीटों से बचाने के लिए नियमित रूप से कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई बार किसानों को हर तीसरे दिन स्प्रे करना पड़ता है और यह प्रक्रिया तीन से चार महीने तक चलती है। इस पर करीब 60 से 70 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं।
इसके अलावा खेतों में काम करने के लिए मजदूरों को भी प्रतिदिन करीब 500 रुपये की दिहाड़ी देनी पड़ रही है। बीज, खाद, दवाइयों, मजदूरी और परिवहन सहित अन्य खर्चों को जोड़ने के बाद किसानों की लागत काफी बढ़ जाती है। मौजूदा बाजार भाव में किसानों के लिए इन खर्चों की भरपाई करना चुनौती बन गया है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र के कई किसान दवा विक्रेताओं से उधार पर कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री ले रहे हैं। ऐसे में किसानों के साथ-साथ कृषि दवा कारोबार से जुड़े दुकानदार भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के अधिकांश किसानों की आय टमाटर की फसल पर निर्भर है, इसलिए बाजार भाव में सुधार उनके लिए बेहद जरूरी है।
प्रेम सिंह ने कहा कि यदि किसानों को टमाटर का भाव 30 से 50 रुपये प्रति किलो तक मिले तो उत्पादन लागत और मेहनत की बेहतर भरपाई हो सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में टमाटर के बाजार भाव में सुधार होगा और किसानों को राहत मिलेगी।