टमाटर के लगातार गिरते दाम और खेती की बढ़ती लागत से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। धारू की धार निवासी किसान सुरेंद्र ठाकुर ने सरकार से किसानों की समस्याओं का समाधान करने और टमाटर के निर्यात के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की है।
सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि इस बार मैदानी क्षेत्रों में बारिश कम होने के कारण वहां टमाटर की फसल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। इसका सीधा असर हिमाचली टमाटर के दाम पर पड़ा है। बाजार में उचित मूल्य नहीं मिलने से किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को टमाटर के निर्यात के लिए ठोस व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि किसानों को बेहतर बाजार मिल सके।
उन्होंने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। लहसुन के बीज की कीमत 160 से 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। ऐसे में किसानों के लिए उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। टमाटर की फसल में कीटनाशकों और दवाइयों पर भी भारी खर्च हो रहा है। करीब एक लाख रुपये की फसल तैयार करने में 40 से 50 हजार रुपये तक दवाइयों के छिड़काव पर खर्च हो जाते हैं।
सुरेंद्र ठाकुर ने हाइब्रिड बीजों और फसलों में बढ़ रही बीमारियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि मक्के की फसल में अमेरिकन सुंडी का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से इस समस्या के समाधान के लिए कृषि विशेषज्ञों के माध्यम से किसानों को उचित जानकारी और सहायता उपलब्ध करवाने की मांग की।
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार किसानों के क्लस्टर बनाकर उन्हें आधुनिक और सुरक्षित कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करे। उनका कहना है कि टमाटर के अच्छे दाम मिलने पर किसान अपनी सालभर की लागत निकाल सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले सीजन में किसानों को फसलों के बेहतर दाम मिलेंगे।