सोलन। हिमाचल प्रदेश में मौसम में हो रहे बदलाव और फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने से किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। सोलन की नौणी पंचायत के पूर्व प्रधान मदन हिमाचली ने किसानों की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि किसान छह महीने तक कड़ी मेहनत कर फसल तैयार करता है, लेकिन बाजार में उसे अपनी उपज का उचित दाम नहीं मिल पाता। वहीं, मंडी से निकलकर बाजार तक पहुंचते-पहुंचते उसी उपज की कीमत कई गुना बढ़ जाती है।
मदन हिमाचली ने कहा कि मौसम का बदलता मिजाज खेती के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। टमाटर की फसल के लिए समय पर बारिश न होना और जरूरत से ज्यादा बारिश होना, दोनों ही नुकसानदायक साबित होते हैं। इससे पैदावार प्रभावित होती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में किसान अपनी सूझबूझ से टमाटर की फसल के बीच शिमला मिर्च और मक्खन बेल जैसी अन्य फसलें लगाकर नुकसान की भरपाई करने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने फसलों के मूल्य निर्धारण की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि दाल, चावल और चीनी जैसी वस्तुओं के कारोबारी अपने उत्पादों के दाम तय करते हैं, लेकिन किसान अपनी मेहनत से उगाई गई फसल का मूल्य खुद निर्धारित नहीं कर पाता। किसान को मौसम की मार, बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
पूर्व प्रधान ने कहा कि किसान की मेहनत से अनेक लोगों की आजीविका चलती है। परिवहनकर्ता, बिचौलिये, आढ़ती और मंडी से जुड़े अन्य लोग कृषि उपज की आपूर्ति व्यवस्था का हिस्सा हैं। उनके अनुसार, एक किसान की उपज से करीब दस लोगों की आजीविका जुड़ी होती है।
मदन हिमाचली ने मीडिया, कृषि विभाग और मंडी प्रशासन से किसानों की इस समस्या को गंभीरता से उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित और न्यायसंगत मूल्य मिलना चाहिए, ताकि खेती लाभकारी बन सके और किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें।