डिजिटल दौर में मोबाइल फोन का बढ़ता उपयोग बच्चों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। स्थानीय निवासी कल्पना ठाकुर ने कहा कि छोटी उम्र में बच्चों को मोबाइल की आदत लगने से उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के स्क्रीन टाइम पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
कल्पना ठाकुर ने बताया कि अक्सर माता-पिता बच्चों को चुप कराने या खाना खिलाने के लिए मोबाइल दे देते हैं। धीरे-धीरे यह आदत लत में बदल जाती है। इसके बाद बच्चे हर समय मोबाइल की मांग करने लगते हैं और फोन न मिलने पर चिड़चिड़े, गुस्सैल और बेचैन हो जाते हैं। कई बार उनकी सहनशक्ति भी कम हो जाती है, जिससे उनका व्यवहार प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि लगातार मोबाइल देखने से बच्चों की आंखों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। कम उम्र में ही कई बच्चों को चश्मा लग रहा है। इसके अलावा खेल-कूद और शारीरिक गतिविधियों से दूरी के कारण उनका मानसिक और शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि बचपन में सक्रिय जीवनशैली बच्चों के समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी है।
कल्पना ठाकुर ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को मोबाइल की बजाय खेल, पुस्तकें, रचनात्मक गतिविधियों और परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि यदि शुरुआत से ही बच्चों के मोबाइल उपयोग पर नियंत्रण रखा जाए और उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाए, तो उनका स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और भविष्य भी अधिक सुरक्षित बन सकेगा।