शिमला। राजधानी शिमला के बालूगंज में दशहरे का पर्व उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने, समाज में व्याप्त बुराइयों को समाप्त करने और भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों को सुरक्षित रखने का संदेश दिया। रामायण के विभिन्न पात्रों के रूप में बच्चों की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा ने कहा कि दशहरा केवल रावण दहन तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह अहंकार, अन्याय और बुराई के अंत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रावण विद्वान और शक्तिशाली होने के बावजूद अपने अहंकार और गलत कर्मों के कारण विनाश को प्राप्त हुआ। इससे सीख मिलती है कि व्यक्ति कितना भी ज्ञानी और सामर्थ्यवान क्यों न हो, यदि वह गलत रास्ते पर चलता है तो उसका अंत निश्चित है।
गोपाल शर्मा ने कहा कि समाज में प्रेम, भाईचारे और महिलाओं के सम्मान की भावना बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को भी जनता के हितों और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा और कर्तव्य पालन की प्रेरणा देता है, जिसे अपनाकर समाज को बेहतर बनाया जा सकता है।
उत्सव के दौरान बच्चों ने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान के पात्रों में आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। वहीं, भगवान शिव के तांडव नृत्य ने भी उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और संस्कारों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।
दशहरा आयोजन समिति के प्रतिनिधि एवं बालूगंज पार्षद दलीप थापा ने आयोजन को सफल बनाने में महिलाओं, समिति के सदस्यों और स्थानीय लोगों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही इस तरह के आयोजन सफल होते हैं। उन्होंने भविष्य में भी महिलाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध करवाने की बात कही। कार्यक्रम का समापन जय श्रीराम के जयघोष के साथ हुआ।
बालूगंज में दशहरा उत्सव, रामलीला की प्रस्तुतियों ने मोहा मन