स्क्रब टाइफस को लेकर सामने आ रही भ्रामक खबरों पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय पाठक ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने एक सप्ताह में स्क्रब टाइफस के 15 मामले सामने आने संबंधी खबर को तथ्यों के विपरीत बताते हुए खंडन किया। सीएमओ ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के पास स्क्रब टाइफस की जांच की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है और लगातार जांच की जा रही है। फिलहाल पिछले काफी समय से अस्पताल में स्क्रब टाइफस का कोई नया मरीज दर्ज नहीं हुआ है।
डॉ. पाठक ने बताया कि स्क्रब टाइफस की शुरुआत सामान्य तौर पर तेज बुखार से होती है। यह बीमारी विशेष रूप से उन लोगों में सामने आने का खतरा रहता है, जो खेतों में काम करते हैं, घास काटते हैं या घासनियों में जाते हैं। ऐसे में इस मौसम के दौरान बुखार की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का स्क्रब टाइफस के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत उपचार किया जाता है। आवश्यकता के अनुसार मरीजों को डॉक्सीसाइक्लिन या अजीथ्रोमाइसिन जैसी दवाएं दी जाती हैं।
सीएमओ ने ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों और घासनियों में काम करने वाले लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि खेतों में जाते समय पूरी बाजू के कपड़े पहनने चाहिए और शरीर को अधिक से अधिक ढककर रखना चाहिए, ताकि हार्ड टिक के काटने का खतरा कम हो सके।
उन्होंने कहा कि खेतों से काम करके घर लौटने के बाद कपड़े बदलने के साथ अच्छी तरह स्नान करना भी जरूरी है। इससे शरीर या कपड़ों के जरिए टिक के घर तक पहुंचने की संभावना कम की जा सकती है। इसके अलावा पालतू जानवरों, विशेषकर कुत्तों को खेतों में साथ ले जाने से बचने की सलाह दी गई है। बाहर घूमने वाले पालतू पशुओं की साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखने को कहा गया है।
सोलन : स्क्रब टाइफस को लेकर भ्रामक खबरों का सीएमओ ने किया खंडन, बचाव के दिए निर्देश