सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों ने 5-डे बैंकिंग समेत विभिन्न लंबित मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन तेज कर दिया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के स्थानीय संयोजक राजेश शाकिया और यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
कर्मचारियों की प्रमुख मांग सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की है। यूनियन के अनुसार यह मामला वर्ष 2015 से लंबित है। वर्ष 2024 में UFBU और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के बीच इस संबंध में समझौता हुआ था और समझौता ज्ञापन सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया, लेकिन अब तक निर्णय नहीं हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि केंद्रीय सरकारी कार्यालयों, एलआईसी, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय क्षेत्रों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है, ऐसे में बैंकों में भी इसे लागू किया जाना चाहिए।
यूनियन ने बैंकों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे कैजुअल कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी उठाई है। कर्मचारियों के अनुसार कई कैजुअल वर्कर 12 से 16 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें मात्र 6 से 8 हजार रुपये मासिक वेतन मिल रहा है। वहीं कर्मचारियों की कमी और काम के बढ़ते दबाव के कारण बैंक कर्मियों को देर शाम तक काम करना पड़ रहा है।
पीएलआई के वितरण को लेकर भी कर्मचारियों में नाराजगी है। यूनियन का आरोप है कि कर्मचारियों के लिए तय इंसेंटिव और अधिकारियों को दिए जा रहे पीएलआई में असमानता है। इसे लेकर कर्मचारियों ने सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए हैं।
यूनियन ने आंदोलन के तहत 28, 29 और 30 तारीख को देशव्यापी तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है। इसके बाद 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है। कर्मचारियों का कहना है कि हड़ताल उनकी मजबूरी है और समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन जारी रहेगा।