सोलन जिले में टमाटर का सीजन अंतिम चरण में पहुंच गया है, लेकिन कम दामों ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। मंडियों में टमाटर के भाव बेहद कम रहने से उत्पादकों को लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि पूरी मेहनत और अच्छी पैदावार के बावजूद इस बार उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
लाविघाट निवासी एवं डांगरी पंचायत के किसान दयाल चंद ने बताया कि इस बार मौसम अनुकूल रहने से टमाटर की फसल अच्छी हुई और उत्पादन भी अधिक रहा, लेकिन उचित दाम नहीं मिलने से पूरा सीजन घाटे में चला गया। उन्होंने बताया कि अब सीजन के अंतिम दौर में वह चार क्रेट टमाटर लेकर मंडी पहुंचे हैं। बिक्री पर्चे के अनुसार उनकी कुल बिक्री करीब 78 हजार रुपये रही, जबकि 40 से 45 हजार रुपये खाद और स्प्रे पर ही खर्च हो गए। इसके अलावा पौधों को सहारा देने के लिए इस्तेमाल होने वाली बल्लियों का खर्च भी अलग है।
दयाल चंद ने कहा कि किसान लगातार इस उम्मीद में फसल मंडी ले जाते रहे कि भाव में सुधार होगा, लेकिन सीजन खत्म होने तक स्थिति नहीं बदली। नुकसान से परेशान कई किसान अब टमाटर की जगह लहसुन और बीन जैसी फसलें लगाने पर विचार कर रहे हैं।
देवघाट निवासी किसान जय सिंह ने कहा कि करीब 250 रुपये प्रति क्रेट के भाव में किसान के लिए खेती करना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि इस बार किसानों की बचत और बजट दोनों प्रभावित हुए हैं। खाद-दवाई का खर्च निकालना भी कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि किसान बड़ी उम्मीद से फसल तैयार करता है, लेकिन नुकसान होने पर पूरा बोझ उसी पर पड़ता है। किसानों ने सरकार से टमाटर के उचित दाम और स्थायी बाजार व्यवस्था की मांग की है।