सोलन मंडी में इन दिनों सेब के बेहतर दाम मिल रहे हैं, लेकिन प्रतिकूल मौसम और बीमारियों के कारण बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिला शिमला के चाखना गांव के बागवान मोहन सिंह झलटा ने बताया कि वह पिछले 8-10 वर्षों से जुलाई माह से ही सोलन मंडी में अपनी फसल लेकर आते हैं। इस बार बाजार में हल्की मंदी के बावजूद अच्छे गुणवत्ता वाले सेब के दाम संतोषजनक मिल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मंगलवार को वह 90 पेटी सेब लेकर मंडी पहुंचे, जिनमें 65 पेटी रेड गोल्डन और शेष गाला किस्म की थीं। रेड गोल्डन सेब 1800 रुपये प्रति पेटी और गाला 2500 रुपये प्रति पेटी के भाव से बिका। उन्होंने बताया कि इससे पहले उनकी हाफ रेड नाशपाती 3500 रुपये प्रति पेटी तथा डाइडमेंट 200 रुपये के भाव पर बिकी थी।
मोहन सिंह झलटा ने कहा कि इस वर्ष ओलावृष्टि और लगातार खराब मौसम ने सेब की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके अलावा पतझड़ रोग के कारण भी पेड़ों को नुकसान पहुंचा, जिससे फल का आकार छोटा रह गया और उसकी चमक भी कम हो गई। इसका असर बाजार में मिलने वाले दामों पर भी पड़ा है। उन्होंने बताया कि अच्छी गुणवत्ता वाले सेब की मांग तो बनी हुई है, लेकिन मध्यम श्रेणी का माल कम मात्रा में मंडी पहुंच रहा है।
उन्होंने बताया कि जहां हर वर्ष उनके बाग से लगभग 5000 पेटी सेब का उत्पादन होता था, वहीं इस बार उत्पादन घटकर केवल 1000 से 1500 पेटी रहने का अनुमान है। हालांकि मंडी में उच्च गुणवत्ता वाले सेब को 3000 से 3500 रुपये प्रति पेटी तक दाम मिल रहे हैं। मंगलवार को बेहतरीन गुणवत्ता वाले सेब का अधिकतम भाव 3700 रुपये प्रति पेटी दर्ज किया गया, जबकि अन्य अच्छी गुणवत्ता के सेब 2500 से 2900 रुपये प्रति पेटी के बीच बिके। बागवानों का कहना है कि यदि मौसम अनुकूल रहता तो इस वर्ष उत्पादन और आय दोनों कहीं बेहतर हो सकती थी।