हिमाचल प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एचआरटीसी के बेड़े में 297 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने जा रही है। इसी कड़ी में सोलन जिले में 6 इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं, जिनका जल्द ही ट्रायल शुरू किया जाएगा। इन बसों की उपयोगिता और पहाड़ी क्षेत्रों में उनकी कार्यक्षमता को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
स्थानीय निवासी सुधीर आहूजा ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसें पर्यावरण के लिहाज से बेहतर पहल हैं, क्योंकि इससे प्रदूषण में कमी आएगी। हालांकि उन्होंने हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों और सड़कों की स्थिति को देखते हुए इनकी सफलता पर सवाल भी उठाए। उनका कहना है कि एक बार चार्ज होने पर करीब 150 किलोमीटर चलने वाली ये बसें क्या राजगढ़ और सुबाथू जैसे दुर्गम व कच्चे मार्गों पर समान क्षमता से चल पाएंगी, यह बड़ा प्रश्न है।
उन्होंने बसों के रूट निर्धारण को लेकर भी चिंता जताई। उनका मानना है कि यदि इन्हें केवल नेशनल हाईवे तक सीमित रखा गया, तो आम जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा। इन बसों की वास्तविक उपयोगिता तब साबित होगी, जब ये ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक सुचारू रूप से सेवाएं देंगी।
अहूजा ने किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी इन बसों की क्षमता पर सवाल उठाते हुए इसे बड़ा निवेश बताया। उन्होंने कहा कि ट्रायल के बाद ही स्पष्ट होगा कि ये बसें पहाड़ी इलाकों में कितनी सफल रहती हैं, अन्यथा यह योजना सरकार के लिए चुनौती बन सकती है।
सोलन: एचआरटीसी के बेड़े में शामिल होंगी 297 इलेक्ट्रिक बसें, सोलन पहुँची 6 बसें ट्रायल पर टिकी उम्मीदें