फिल्म निर्माता मुकेश मोदी और लेखक अनुषि शर्मा ने फिल्म ‘खूंटा: प्रेम, पीड़ा व प्रकृति’ के संबंध में जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह फिल्म प्रेम कहानी के साथ हिमाचल की संस्कृति, आस्था और प्रकृति के संरक्षण का संदेश देती है। फिल्म पूरे भारत में रिलीज हो रही है और इसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
फिल्म निर्माता मुकेश मोदी ने बताया कि ‘खूंटा’ केवल मनोरंजन तक सीमित फिल्म नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से प्रकृति और संस्कृति के बीच गहरे संबंध को सामने लाने का प्रयास किया गया है। फिल्म का मुख्य संदेश ‘प्रकृति बचेगी तो रचेगी संस्कृति’ है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर पहाड़ों से लगातार छेड़छाड़ का असर प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है। हिमाचल, उत्तराखंड, असम और नेपाल में बाढ़ व भूस्खलन जैसी घटनाएं चिंता का विषय हैं। ऐसे में प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर विकास करना जरूरी है।
फिल्म की लेखक अनुषि शर्मा ने कहा कि ‘खूंटा’ का सार प्रेम, अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़ाव तथा जीवनदायिनी प्रकृति के मेल में निहित है। उनके अनुसार फिल्मों में हिमाचल को अक्सर केवल पहाड़ों और बर्फबारी की खूबसूरत पृष्ठभूमि के तौर पर दिखाया गया है, जबकि यहां के लोगों की जीवनशैली, आपसी भाईचारे और प्रकृति के साथ उनके आस्था आधारित संबंधों को पर्याप्त स्थान नहीं मिला।
अनुषि शर्मा ने हिमाचल में स्थानीय फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, पंजाबी और भोजपुरी सिनेमा की तरह हिमाचली सिनेमा को भी मजबूत मंच मिलना चाहिए। स्थानीय स्तर पर अवसरों की कमी के कारण प्रदेश के कलाकारों को रोजगार और पहचान के लिए मुंबई का रुख करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सिनेमा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रभावी माध्यम है। ‘खूंटा’ इसी उद्देश्य के साथ बनाई गई फिल्म है, जो प्रेम और संस्कृति के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास करती है। BITE – Anushi shrama Writter खूंटा मूवी, मुकेश मोदी प्रोडूसर खूंटा मूवी
सोलन : ‘खूंटा’ में प्रेम, संस्कृति और प्रकृति का संदेश, हिमाचल की जड़ों से जुड़ी कहानी