मौसम में बदलाव के साथ सोलन क्षेत्र में कृषि गतिविधियां भी धीमी पड़ने लगी हैं। बरसात का मौसम समाप्त होने के बाद अब ठंड का असर बढ़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान तापमान में गिरावट के कारण नई फसलों का उत्पादन सीमित हो जाता है। ऐसे में इस वर्ष फसलों को हुए नुकसान और उचित दाम नहीं मिलने का असर किसानों के साथ-साथ स्थानीय व्यापार पर भी दिखाई दे रहा है।
स्थानीय व्यापारी धर्मेंद्र ठाकुर के अनुसार हाल के दिनों में क्षेत्र में टमाटर, बीन, गोभी और शिमला मिर्च सहित विभिन्न सब्जियों की फसलें हुईं। इनमें टमाटर सोलन क्षेत्र की प्रमुख नकदी फसल है, लेकिन इस बार किसानों को टमाटर के अपेक्षित दाम नहीं मिल पाए। स्थिति यह रही कि कई किसानों के लिए फसल पर आई लागत निकालना भी मुश्किल हो गया। दवाइयों, खाद, बीज और अन्य कृषि सामग्री पर किया गया खर्च भी पूरी तरह नहीं निकल पाया।
किसानों की आमदनी प्रभावित होने का सीधा असर स्थानीय बाजार पर भी पड़ा है। सामान्य तौर पर फसल बेचने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों से किसान बाजार पहुंचते हैं और घरेलू जरूरतों सहित अन्य सामान की खरीदारी करते हैं। इससे दुकानों पर कारोबार बढ़ता है। इस बार फसल से पर्याप्त आय नहीं होने के कारण बाजार में खरीदारी प्रभावित हुई है। व्यापारियों के अनुसार दुकानों पर बिक्री कम रहने से कारोबार में सुस्ती बनी हुई है।
वहीं, क्षेत्र की सीजन की आखिरी प्रमुख फसल मक्की भी इस बार अच्छी नहीं हो सकी। शुरुआती दौर में बीमारी लगने के कारण कई क्षेत्रों में मक्की की फसल प्रभावित हुई। मक्की ग्रामीण परिवारों के लिए आय के साथ-साथ घरेलू जरूरत का भी महत्वपूर्ण साधन है।
सर्दियों के दौरान मक्की की रोटी यहां के पारंपरिक भोजन का प्रमुख हिस्सा रहती है। फसल कम होने के कारण किसानों को घरेलू उपयोग के लिए भी बाजार से मक्की खरीदनी पड़ सकती है। किसानों और व्यापारियों का कहना है कि फसलों के उचित दाम और नुकसान की स्थिति में समय पर सहायता मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सकता है।