नौणी पंचायत के पूर्व प्रधान मदन हिमाचली ने क्षेत्र के किसानों की बदहाल आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि टमाटर की खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है। उन्होंने बताया कि किसान दिन-रात मेहनत करने के बावजूद अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं पा रहे हैं, जिससे खेती के प्रति उनका उत्साह कम होता जा रहा है।
मदन हिमाचली ने बताया कि कुछ समय पहले तक टमाटर 1000 से 1100 रुपये प्रति क्रेट तक बिक रहा था, लेकिन अब इसके दाम घटकर 250 से 300 रुपये प्रति क्रेट रह गए हैं। उन्होंने कहा कि अधिक आवक, लगातार बारिश और फसल में फैल रही बीमारियों के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंडियों में किसानों से कम कीमत पर खरीदी गई उपज बाजार में कई गुना अधिक दाम पर बेची जाती है। ऐसे में सबसे अधिक नुकसान किसान और उपभोक्ता दोनों को उठाना पड़ता है, जबकि बिचौलियों को फायदा होता है। उन्होंने सरकार से बिचौलिया व्यवस्था पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
मदन हिमाचली ने कहा कि दवाइयों, खाद और स्प्रे पर बढ़ते खर्च के कारण टमाटर की खेती में किसानों को लगभग 95 प्रतिशत तक नुकसान हो रहा है। हालांकि शिमला मिर्च, मक्खन बीन और लहसुन जैसी फसलों के अच्छे दाम मिलने से कुछ राहत जरूर मिली है। उन्होंने कहा कि कई किसान अब टमाटर के नुकसान की भरपाई के लिए वैकल्पिक फसलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं।