कमर्शियल गैस सिलेंडरों की लगातार बढ़ती कीमतों ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के सामने आजीविका का संकट खड़ा कर दिया है। हालांकि इन महिलाओं ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय पारंपरिक तरीकों को अपनाकर अपने रोजगार को जारी रखा है। सोलन ब्लॉक की कई महिलाएं अब महंगे गैस सिलेंडरों के स्थान पर अंगीठी और लकड़ियों का उपयोग कर पारंपरिक व्यंजन तैयार कर रही हैं।
स्वयं सहायता समूह की सदस्य कृष्णा ने बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 3200 से 3500 रुपये तक पहुंच चुकी है। उनका स्टॉल सुबह से देर शाम तक संचालित होता है, जिसके चलते एक सिलेंडर केवल दो से तीन दिन ही चल पाता है। सीमित आय के कारण बार-बार महंगा सिलेंडर खरीदना उनके लिए कठिन हो गया था।
एक अन्य सदस्य उषा ने बताया कि शुरुआत में सिलेंडर की उपलब्धता भी बड़ी समस्या थी। वर्तमान में ऑफ-सीजन होने के कारण बिक्री अपेक्षाकृत कम है, जिससे बढ़ते खर्चों को संभालना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में महिलाओं ने अंगीठी का सहारा लेने का निर्णय लिया।
महिलाओं ने बताया कि समूह की सदस्य अपने-अपने घरों से लकड़ियां लाकर अंगीठी जलाती हैं और उसी पर सिड्डू, साग, मक्की की रोटी तथा मालपूड़े जैसे पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं। उनका कहना है कि अंगीठी पर बने भोजन का स्वाद ग्राहकों को विशेष रूप से पसंद आता है और इसी कारण नियमित ग्राहक उनके स्टॉल तक पहुंचते हैं।
महिलाओं का कहना है कि ग्राहकों के विश्वास और मांग को देखते हुए वे काम बंद नहीं कर सकतीं। उन्होंने सरकार से कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कीमतों में राहत देने की मांग की है ताकि छोटे व्यवसायियों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। महिलाओं की यह पहल विपरीत परिस्थितियों में आत्मनिर्भरता और संघर्ष की मिसाल बनकर सामने आई है।