बदलते मौसम और पानी की लगातार बढ़ती कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जहां कुछ फसलों को मौजूदा परिस्थितियों का लाभ मिल रहा है, वहीं कई फसलें मौसम की मार झेलने के खतरे का सामना कर रही हैं। जिला सिरमौर के सतोड़ा गांव के किसान कृष्ण चंद ने मंडी में फसल बेचने के दौरान अपनी चिंताएं साझा करते हुए बताया कि मौसम में हो रहे बदलाव का असर कृषि पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
कृष्ण चंद ने बताया कि वह दो कट्टे बीन लेकर मंडी पहुंचे थे, जिन्हें इस बार अच्छे दाम मिले हैं। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले तक बीन का भाव करीब 50 रुपये प्रति किलोग्राम था, जबकि अब इसकी कीमत बढ़कर 82 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इससे किसानों को कुछ राहत मिली है। हालांकि लहसुन उत्पादकों की स्थिति उतनी संतोषजनक नहीं है। किसान अपने साथ एक कट्टा लहसुन भी लेकर आए थे, लेकिन बाजार में लहसुन के अपेक्षित दाम नहीं मिल रहे हैं, जिससे उन्हें निराशा हुई।
उन्होंने कहा कि यदि आने वाले दिनों में वातावरण में नमी बढ़ती है तो इसका सबसे अधिक असर लहसुन की फसल पर पड़ सकता है। अधिक नमी से लहसुन खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। दूसरी ओर यही नमी अन्य फसलों के लिए लाभदायक साबित होगी और खेतों में हरियाली लौट सकती है।
कृष्ण चंद ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में टमाटर, सलाद वाली मिर्च और बीन की खेती की है। इन फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए पर्याप्त वर्षा आवश्यक है, लेकिन वर्तमान में क्षेत्र में पानी की भारी कमी बनी हुई है। कई प्राकृतिक जल स्रोत सूखने की कगार पर पहुंच चुके हैं। हालांकि बीते दिन हुई हल्की बारिश से किसानों को कुछ राहत मिली है और जमीन में नमी आने से फसलों को अस्थायी लाभ मिलने की उम्मीद जगी है। किसानों का कहना है कि अच्छी बारिश ही कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत दे सकती है।