सोलन। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और देश के प्रति समर्पण की भावना विकसित करना भी है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। यह विचार विश्वविद्यालय में शिक्षा, विद्यार्थियों के दायित्वों और संस्थान के वातावरण से जुड़े विषयों पर चर्चा के दौरान व्यक्त किए गए।
विश्वविद्यालय परिसर में माहौल और कुलपति स्तर पर चल रही तनातनी को लेकर कहा गया कि इस तरह की परिस्थितियां नहीं बननी चाहिए, क्योंकि इनका विद्यार्थियों की पढ़ाई और मानसिकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कुछ लोगों द्वारा व्यक्तिगत कारणों से ऐसा माहौल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिनसे उचित तरीके से निपटा जा रहा है।
संस्थान में विभिन्न फैकल्टी की ओर से दी जा रही शिक्षा की सराहना करते हुए कहा गया कि विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ राष्ट्रभक्ति और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध भी कराया जा रहा है। संस्थान पिछले करीब 16 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहा है। यहां देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने पहुंचते हैं।
शिक्षा पूरी कर रहे विद्यार्थियों से आह्वान किया गया कि वे समाज के प्रति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें। प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में युवाओं को अपनी प्रतिभा, सकारात्मक सोच और योगदान के माध्यम से अहम भूमिका निभानी होगी।