अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में हुई फीस वृद्धि का विरोध करते हुए प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्र विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया है। एबीवीपी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं जिला संयोजक सिरमौर बृजेश कांवर ने कहा कि नौणी विश्वविद्यालय में फीस में 52 से 62 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है, जिससे छात्रों और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1985 में स्थापित इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य ग्रामीण और साधारण परिवारों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान निर्णय उस उद्देश्य के विपरीत है। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय की पहली काउंसलिंग 3 अगस्त को प्रस्तावित है और उससे ठीक पहले फीस वृद्धि लागू कर दी गई। वहीं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में भी 25 से 27 प्रतिशत तक फीस बढ़ाई गई है।
बृजेश कांवर ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार लगातार छात्र विरोधी निर्णय ले रही है और आर्थिक संकट का बोझ विद्यार्थियों पर डाला जा रहा है। उन्होंने बताया कि एबीवीपी ने शुक्रवार को विभिन्न शिक्षण संस्थानों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर फीस वृद्धि तुरंत वापस लेने की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्णय वापस नहीं लिया तो विद्यार्थी परिषद चरणबद्ध आंदोलन को तेज करेगी। इसके तहत 17 अगस्त को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन कर छात्रों की आवाज बुलंद की जाएगी।
सोलन : नौणी और एचपीयू में फीस वृद्धि के खिलाफ एबीवीपी का प्रदर्शन, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग