शिमला जिले की कोटखाई तहसील के कलबोग उबादेश क्षेत्र के सोलन मंडी में रॉयल किस्म के करीब 150 पेटियां सेब लेकर पहुंचे। उन्होंने मंडी में मिल रहे दामों और सेब की पैकिंग व्यवस्था को लेकर जानकारी साझा करते हुए बागवानों से सरकार द्वारा निर्धारित यूनिवर्सल पैकिंग मानकों का पालन करने की अपील की।
कृष्ण लाल बरोठा ने बताया कि इस वर्ष हिमाचल में सेब की फसल अपेक्षाकृत कम हुई है। इसके चलते मंडियों में गुणवत्ता के आधार पर बागवानों को अच्छे दाम मिल रहे हैं। सोलन मंडी में उनके लॉट का ए-ग्रेड रॉयल सेब 2500 रुपये प्रति पेटी और सवा नंबर सेब 1600 रुपये प्रति पेटी के भाव पर बिका।
उन्होंने बताया कि कलबोग उबादेश क्षेत्र में सेब के अलावा विभिन्न प्रकार के स्टोन फ्रूट्स की भी पैदावार होती है। कोटखाई क्षेत्र में सेब का सीजन टाइटमैन किस्म से शुरू होता है। इसके बाद रॉयल और रेड गोल्ड जैसी किस्मों की आवक होती है। क्षेत्र में प्लम, चेरी, शक्करपारा और खुरमानी जैसे फलों का भी उत्पादन किया जाता है।
बरोठा ने बागवानों से आग्रह किया कि सेब की फसल पूरी तरह तैयार होने के बाद ही उसे मंडी में भेजें। उन्होंने विशेष रूप से 20 किलो के यूनिवर्सल कार्टन नियम का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कई किसान ओवरवेट पेटियां मंडियों में भेज रहे हैं, जिससे पैकिंग में परेशानी आती है और पेटियों पर ढक्कन तक ठीक से नहीं लग पाते।
उन्होंने कहा कि बागवान सेब को निर्धारित मानकों के अनुसार 20 किलो की यूनिवर्सल पैकिंग में ही मंडियों तक पहुंचाएं, ताकि व्यवस्था सुचारू बनी रहे।