आईसीएआर-खुम्ब अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) चंबाघाट में 29वें राष्ट्रीय मशरूम मेले का आयोजन किया गया। मेले में देशभर से मशरूम उत्पादक, कृषि वैज्ञानिक और उद्यमी पहुंचे। इस दौरान मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण, विपणन और औषधीय मशरूम की खेती से संबंधित जानकारी साझा की गई।
डीएमआर के निदेशक डॉ. ब्रिज लाल अत्रि ने कहा कि प्रयोगशालाओं में विकसित नई किस्मों और तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना मेले का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि भारत में प्रति व्यक्ति मशरूम की उपलब्धता करीब 200 से 250 ग्राम सालाना है, जबकि देश में प्रतिवर्ष लगभग 750 मिलियन टन कृषि अवशेष पैदा होते हैं। इनमें से केवल एक से दो प्रतिशत अवशेष का उपयोग मशरूम उत्पादन में किया जाए तो बड़ी मात्रा में उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती कम जगह और कम पानी में की जा सकती है, इसलिए यह महिलाओं और युवाओं के लिए स्वरोजगार का बेहतर माध्यम बन सकती है। उत्पादन लागत कम करने और पैदावार बढ़ाने के लिए भविष्य में एआई तथा डिजिटल तकनीक को भी बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारत मशरूम उत्पादन में विश्व में तीसरे स्थान पर है और करीब 12 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर के साथ जल्द दूसरे स्थान पर पहुंचने की संभावना है।
मेले में महेंद्रगढ़ के योगेंद्र कुमार को मशरूम क्षेत्र में नवाचार के लिए सम्मानित किया गया। वर्ष 2014 से मशरूम उत्पादन कर रहे योगेंद्र सात से अधिक किस्मों की खेती के साथ प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर कार्य कर रहे हैं।
वहीं मोरनी हिल्स के औषधीय मशरूम उत्पादक वीरेंद्र बाजवान ने किसानों से कच्चा मशरूम बेचने के बजाय प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि वह गैनोडर्मा सहित शिटाके, लायंस मेन, कॉर्डिसेप्स और ऑयस्टर मशरूम पर काम कर रहे हैं तथा गैनोडर्मा से 11 वैल्यू एडेड उत्पाद विकसित कर चुके हैं। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक संस्थानों से प्रशिक्षण लेकर मशरूम को व्यवसाय और उद्योग के रूप में विकसित करने की अपील की। BITE – योगेंद्र कुमार हरियाणा निवासी, विरेंद्र वजवां मोर्नी हिल्स डिस्टिक पंचकूला हरियाणा निवासी, डॉ ब्रिज लाल अत्रि डायरेक्टर ICAR खुम्ब अनुसंधान निदेशालय चम्बाघाट सोलन