सोलन। शहर में पिछले दिनों गहराए पेयजल संकट को लेकर भाजपा सोलन शहरी मंडल के अध्यक्ष शैलेंद्र ने जल शक्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल से उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पेयजल आपूर्ति में आई भारी गिरावट के कारण लोगों को कई दिनों तक पानी के लिए परेशान होना पड़ा। इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
शैलेंद्र ने आरोप लगाया कि जल शक्ति विभाग की ओर से शहर में पानी की आपूर्ति के वास्तविक आंकड़े स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखे गए। उन्होंने बताया कि 4 से 28 अक्टूबर के बीच शहर को औसतन करीब 74 लाख लीटर पानी प्रतिदिन दिया गया, जबकि 21 अक्टूबर को आपूर्ति घटकर 54 लाख लीटर और 22 अक्टूबर को केवल 37 लाख लीटर रह गई। इसके चलते लोगों को छठे, सातवें और आठवें दिन तक पानी का इंतजार करना पड़ा।
उन्होंने 21 और 22 अक्टूबर को चार मोटरों के खराब होने तथा ट्रांसफार्मर में आई गड़बड़ी पर भी सवाल उठाए। शैलेंद्र के अनुसार, जलापूर्ति व्यवस्था के रखरखाव के लिए करीब चार करोड़ रुपये की वार्षिक रखरखाव एवं मरम्मत व्यवस्था (एएमसी) होने के बावजूद ऐसी स्थिति पैदा होना जांच का विषय है। उन्होंने बिजली विभाग के उस कथित तर्क का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार ट्रांसफार्मर खराब होने से मोटरों का खराब होना आवश्यक नहीं है।
भाजपा मंडल अध्यक्ष ने गिरी-कसौली पेयजल योजना में देरी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि योजना का काम पिछले चार वर्षों से लंबित है और इसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए।
शैलेंद्र ने मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल से मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सर्दियों और आगामी गर्मियों में शहरवासियों को दोबारा ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े, इसके लिए स्थायी समाधान जरूरी है।