सोलन और परवाणू फल मंडियों में इस बार सेब की आवक पिछले वर्ष की तुलना में आधी से भी कम रह गई है। हालांकि कम फसल के बीच अच्छी गुणवत्ता और बेहतर ग्रेडिंग वाले सेब को पहले से अच्छे दाम मिल रहे हैं। मंडी में सेब का कारोबार लगातार जारी है और बागवानों को अच्छी क्वालिटी के फल के बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बनी हुई है।
शिमला जिले के रोहड़ू तहसील के बसला गांव निवासी बागवान बंटी ने मंडी की जमीनी स्थिति साझा करते हुए बताया कि इस वर्ष मौसम की मार से बागवानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। कम पैदावार के साथ कई बगीचों में पौधों के सूखने की समस्या भी सामने आई है। बंटी स्वयं रॉयल किस्म के करीब 100 से 102 बॉक्स सेब लेकर सोलन मंडी पहुंचे हैं।
बंटी ने बताया कि उनके क्षेत्र में पारंपरिक रॉयल, रेड और रिचर्ड किस्मों के साथ अब बागवान आधुनिक किस्मों की ओर भी बढ़ रहे हैं। कई बागवानों ने गाला और किंग रमैन जैसी किस्मों के पौधे लगाए हैं। उनका कहना है कि बदलते समय के साथ बागवान बगीचों में किस्मों का विविधीकरण कर रहे हैं, ताकि बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन किया जा सके।
उन्होंने मंडी में शुरुआती कारोबार को लेकर कहा कि सीजन के आरंभ में जब नया फल बाजार में आता है तो मांग अधिक होने के कारण उसके भाव भी तेज रहते हैं। शुरुआती दौर में फल का रंग हरा है या लाल, इस पर उतना जोर नहीं रहता। मांग अधिक होने के कारण सेब सहित आम, कीनू और मालदा जैसे फलों के शुरुआती भाव भी सामान्य तौर पर बेहतर रहते हैं।
एपीएमसी के आंकड़ों के अनुसार सोलन और परवाणू मंडियों में इस बार आवक में कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद बेहतर गुणवत्ता वाले सेब को पहले से अच्छे दाम मिलना बागवानों के लिए राहत की बात है।