सोलन में एक संस्थान के प्रबंधन पर मजदूरों के शोषण और श्रम कानूनों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए एआईटीयू ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन के कोषाध्यक्ष अनूप पाराशर ने प्रबंधन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है और कथित तौर पर वेतन जारी करने से पहले उनसे इस्तीफा देने के लिए कहा जा रहा है।
अनूप पाराशर ने कहा कि श्रम कानूनों के तहत कर्मचारियों को निर्धारित समय पर वेतन का भुगतान किया जाना चाहिए। यदि किसी कारण से वेतन भुगतान में देरी होती है तो प्रबंधन को कर्मचारियों और उनके प्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बजाय कर्मचारियों से पहले इस्तीफा देने और उसके बाद वेतन लेने की बात कही जा रही है।
उन्होंने कहा कि संस्थान में किया जा रहा काम स्थायी प्रकृति का है। ऐसे में कर्मचारियों से इस्तीफा मांगना उचित नहीं है। उन्होंने स्थायी प्रकृति के कार्यों में ठेका श्रम व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए।
AITU ने यह भी आरोप लगाया कि संस्थान में कई मजदूर 15 वर्षों से अधिक समय से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक निर्धारित पहचान पत्र उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं। संगठन का कहना है कि इस मामले को श्रम विभाग के समझौता अधिकारी के समक्ष कई बार उठाया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि 14 तारीख को श्रम विभाग के समझौता अधिकारी की मौजूदगी में प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच बैठक हुई थी। इसमें कर्मचारियों की ओर से लिखित रूप में कहा गया कि वे प्रबंधन के साथ सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले उनका बकाया वेतन बैंक खातों में जमा किया जाए। इसके बाद ही वार्ता आगे बढ़ाई जाए।
पाराशर के अनुसार प्रबंधन ने इस मांग पर विचार करने के लिए एक घंटे का समय मांगा था, लेकिन इसके बाद भी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया। AITU ने प्रदेश सरकार और श्रम विभाग से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर मजदूरों के अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की है। BITE – कोषाध्यक्ष अनूप पाराशर AITU
सोलन में मजदूरों के शोषण का आरोप, वेतन भुगतान और श्रम अधिकारों को लेकर AITU का प्रदर्शन