सोलन। जटोली मंदिर के समीप स्थित इंटीग्रेटेड मस्कुलर डिस्ट्रॉफी रिहैबिलिटेशन सेंटर में सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ऑडिटोरियम की सुविधा शुरू की गई है। केंद्र की अध्यक्ष संजना गोयल ने बताया कि इस ऑडिटोरियम के माध्यम से होने वाली आय का उपयोग मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित मरीजों के पुनर्वास और उनकी सहायता के लिए किया जाएगा। उन्होंने आम जनता से इस सुविधा का उपयोग कर सामाजिक कार्य में योगदान देने की अपील की।
संजना गोयल ने बताया कि ऑडिटोरियम में एक साथ करीब 100 लोगों के बैठने की व्यवस्था है, जबकि आवश्यकता पड़ने पर 50 अतिरिक्त कुर्सियों का प्रबंध भी किया जा सकता है। हॉल में स्टेज, बेहतर साउंड और अकाउस्टिक्स सिस्टम की सुविधा उपलब्ध है। इसके संचालन के लिए साउंड ऑपरेटर भी मुहैया करवाया जाता है। इसके अलावा कार्यक्रमों के दौरान खानपान की व्यवस्था के लिए पर्याप्त जगह और छोटा किचन भी बनाया गया है। सामाजिक आयोजनों के लिए हॉल का किराया 15 हजार रुपये प्रतिदिन निर्धारित किया गया है। इससे प्राप्त होने वाली पूरी राशि मरीजों की सहायता और पुनर्वास पर खर्च की जाएगी।
उन्होंने बताया कि मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक लाइलाज बीमारी है, लेकिन नियमित रिहैबिलिटेशन और फिजियोथेरेपी से मरीजों की शारीरिक क्षमता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है। यह केंद्र देश में अपनी तरह की विशेष सुविधा उपलब्ध करवा रहा है, जहां मरीजों को फिजियोथेरेपी, हाइड्रोथेरेपी, योग और प्राणायाम सहित विभिन्न उपचारात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।
संजना गोयल के अनुसार केंद्र में उपचार और पुनर्वास के प्रयासों से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। तीन-तीन महीने तक व्हीलचेयर पर रहने वाले मरीजों को भी खड़ा करने और चलने में सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि केंद्र का उद्देश्य प्रभावित बच्चों और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास करना है। ऑडिटोरियम से मिलने वाला सामाजिक सहयोग इन प्रयासों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।