सोलन। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए नगर निगम सोलन और पशुपालन विभाग के सहयोग से एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) कार्यक्रम लगातार चलाया जा रहा है। उप निदेशक पशुपालन विभाग डॉ. विवेक लांबा ने बताया कि अभियान के तहत नगर निगम के एबीसी सेंटर में प्रत्येक मंगलवार को करीब 25 से 30 आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि कुत्तों की नसबंदी के लिए छह डॉक्टरों की विशेष टीम पूरे दिन केंद्र में तैनात रहती है। नगर निगम की टीम ऑपरेशन से एक दिन पहले कुत्तों को पकड़कर केंद्र में लाती है और शल्य चिकित्सा की तैयारी की जाती है। ऑपरेशन के बाद तीन से चार दिन तक कुत्तों की देखभाल की जाती है, ताकि घाव पूरी तरह भर सकें। पूरी प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय और एनिमल वेलफेयर बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जा रही है।
डॉ. लांबा के अनुसार सोलन शहर में करीब 1,200 आवारा कुत्ते होने का अनुमान है। इनमें से अब तक 702 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। अभियान की मौजूदा गति बनी रहने पर अगले तीन से चार महीनों में निर्धारित लक्ष्य पूरा करने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि डॉक्टरों और अन्य जनशक्ति के खर्च को छोड़कर प्रत्येक कुत्ते की दवाइयों पर करीब 1,200 से 1,400 रुपये खर्च आता है। विभाग के पास फिलहाल करीब 500 अन्य कुत्तों के उपचार और नसबंदी के लिए दवाइयां उपलब्ध हैं। अभियान के तहत की जा रही नसबंदी, उपचार और अन्य गतिविधियों की जानकारी भारत सरकार के भारत पशुधन ऐप पर भी अपलोड की जा रही है। विभाग का उद्देश्य निर्धारित लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा कर आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करना है।