स्वास्थ्य विभाग की ओर से एचआईवी और एड्स नियंत्रण को लेकर मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के सभी इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (आईसीटीसी) के कर्मचारियों तथा टार्गेटेड इंटरवेंशन (टीआई) कार्यक्रम के तहत कार्य कर रही गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में पिछले माह किए गए कार्यों की समीक्षा के साथ आगामी गतिविधियों को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय पाठक ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि एचआईवी और सिफलिस संक्रमण की समय पर पहचान और रोकथाम के लिए जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाना जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला की एंटीनेटल चेकअप (एएनसी) के दौरान कॉम्बो किट के माध्यम से एचआईवी और सिफलिस की 100 फीसदी जांच सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान संक्रमण की पहचान होने पर समय रहते आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने में मदद मिल सकती है। इसके लिए स्वास्थ्य संस्थानों में जांच प्रक्रिया को नियमित और प्रभावी तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए गए।
डॉ. पाठक ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति एचआईवी या सिफलिस से संक्रमित पाया जाता है तो उसके संपर्क में आए लोगों की कांटेक्ट ट्रेसिंग और जांच भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि संक्रमित व्यक्ति के संपर्कों की समय पर पहचान और जांच संक्रमण की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है।
बैठक में जागरूकता गतिविधियों को बढ़ाने पर भी चर्चा की गई। डॉ. पाठक ने कहा कि वर्तमान समय में डेटिंग ऐप्स के माध्यम से अनजान लोगों से संपर्क और मुलाकात का चलन बढ़ा है। ऐसे में लोगों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य और संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है। उन्होंने सुरक्षित व्यवहार अपनाने और आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य संस्थानों में जांच करवाने की अपील की।
बैठक में आईसीटीसी कर्मियों और टीआई कार्यक्रम से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने तथा निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच लोगों तक सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
सोलन : एचआईवी और सिफलिस की 100 फीसदी जांच और कांटेक्ट ट्रेसिंग सुनिश्चित करने के निर्देश