भारतीय जनता पार्टी सोलन शहरी मंडल के अध्यक्ष शैलेंद्र ने 15 सितंबर 2026 को हुए किशाऊ बांध समझौते को क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने इस समझौते के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छह राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित इस परियोजना को लेकर सहमति बनना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
शैलेंद्र ने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना का इतिहास काफी पुराना है। वर्ष 1944 में इसकी योजना तैयार की गई थी, लेकिन लंबे समय तक यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद 12 मई 1994 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव और केंद्रीय जल संसाधन मंत्री विद्याचरण शुक्ल के नेतृत्व में पांच राज्यों के बीच बैठक हुई थी। उस समय उत्तराखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में नहीं था और उत्तर प्रदेश का हिस्सा था।
उन्होंने बताया कि उस बैठक में हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, हरियाणा के मुख्यमंत्री भजन लाल, राजस्थान से भैरों सिंह शेखावत, दिल्ली के मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
शैलेंद्र ने कहा कि मौजूदा समझौते के तहत परियोजना के खर्च का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ कम होगा और लंबे समय से लंबित परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना जल भंडारण, सिंचाई, पेयजल और विद्युत उत्पादन जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि छह राज्यों के बीच सहमति बनने से परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।
शैलेंद्र ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस समझौते को लेकर की जा रही बयानबाजी प्रदेश और राष्ट्रहित के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण समझौतों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग रखकर विकास और जनहित के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।