नगर निगम सोलन क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे डॉग स्टेरलाइजेशन अभियान के तहत पशुपालन विभाग की ओर से आवश्यक सहयोग उपलब्ध करवाया जा रहा है। अभियान के तहत पशुपालन विभाग सर्जनों की टीम, फार्मासिस्ट और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध करवाकर स्टेरलाइजेशन कैंप आयोजित कर रहा है। यह सर्जरी नगर निगम के एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर में उपलब्ध सुविधाओं का उपयोग करते हुए की जा रही है।
पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. विवेक लांबा ने अभियान से संबंधित जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रत्येक कुत्ते की स्टेरलाइजेशन सर्जरी में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों पर करीब 1200 से 1500 रुपये तक का खर्च आ रहा है। उन्होंने बताया कि दवाइयों पर होने वाला यह खर्च नगर निगम की ओर से एनजीओ को दिए जा रहे बजट से अलग है।
उन्होंने बताया कि नगर निगम की ओर से अभियान में सहयोग कर रहे एनजीओ को सर्जरी के बाद कुत्तों की देखभाल और निर्धारित अवधि तक उनके रखरखाव के लिए खर्च उपलब्ध करवाया जा रहा है। सर्जरी के बाद कुत्तों को तुरंत उनके क्षेत्र में नहीं छोड़ा जाता, बल्कि उनकी आवश्यक देखभाल की जाती है।
डॉ. लांबा के अनुसार सर्जरी के बाद कुत्तों को करीब तीन दिन तक एबीसी सेंटर में रखा जाता है। इस दौरान उनकी देखभाल और स्वास्थ्य की निगरानी की जाती है। तीन दिन की अवधि पूरी होने के बाद कुत्तों को उसी स्थान पर वापस छोड़ दिया जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
उन्होंने बताया कि अभियान में पशुपालन विभाग, नगर निगम और संबंधित एनजीओ के स्तर पर समन्वय के साथ कार्य किया जा रहा है। स्टेरलाइजेशन के माध्यम से कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के साथ-साथ उनकी देखभाल और सुरक्षित तरीके से पुनः उसी क्षेत्र में छोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
सोलन में डॉग स्टेरलाइजेशन अभियान तेज, प्रति कुत्ता दवाइयों पर खर्च हो रहे 1200 से 1500 रुपये