नगर निगम सोलन और गैर सरकारी संगठन आस्था की ओर से आवारा कुत्तों की नसबंदी का अभियान मानसून ब्रेक के बाद दोबारा शुरू कर दिया गया है। अभियान के तहत अब तक 675 आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है, जबकि शहर में करीब 500 से 600 कुत्तों की नसबंदी होना अभी बाकी है। विभाग ने अगले तीन से चार महीनों में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने की उम्मीद जताई है।
उप निदेशक डॉ. विवेक लांबा ने बताया कि मानसून के दौरान नसबंदी के बाद कुत्तों के जख्मों में नमी के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही बारिश के बीच आवारा कुत्तों को पकड़ने में भी परेशानी होती है। इसी वजह से नगर निगम और एनजीओ के बीच सहमति के बाद 16 जून के बाद अभियान को करीब दो से ढाई महीने के लिए रोक दिया गया था।
मानसून समाप्त होने के बाद 8 सितंबर से अभियान फिर शुरू किया गया। पहले चरण में 29 आवारा कुत्तों की नसबंदी की गई, जिनमें 20 मादा और नौ नर कुत्ते शामिल रहे। इस दौरान कुछ मादा कुत्ते गर्भावस्था में भी पाई गईं।
डॉ. लांबा के अनुसार वर्तमान में सप्ताह में 25 से 27 कुत्तों की नसबंदी और देखभाल की सुविधा उपलब्ध है। यदि कम से कम 25 कुत्तों की नसबंदी प्रत सप्ताह की रफ्तार कायम रही तो आगामी तीन से चार महीनों में लक्ष्य पूरा किया जा सकता है।
अभियान में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है। नसबंदी के बाद कुत्तों को तीन से चार दिन तक केज में रखकर खान-पान और दवाइयां दी जाती हैं। करीब एक सप्ताह की देखभाल पूरी होने के बाद उन्हें उनके पुराने स्थान पर वापस छोड़ा जाता है।