एमएमयू कर्मचारियों का पिछले 22 दिनों से सड़क पर चल रहा धरना-प्रदर्शन जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हो गया है। 10 सितंबर को कर्मचारी प्रतिनिधियों और एमएमयू प्रबंधन के बीच औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 12(3) के तहत समझौता हुआ। अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी के सचिव अतुल चंद्र भारद्वाज ने इसे कर्मचारियों की एकजुटता, धैर्य और निरंतर संघर्ष की जीत बताया।
समझौते के अनुसार सभी कर्मचारी 12 सितंबर से अपनी ड्यूटी पर लौटेंगे। किसी भी कर्मचारी को इस्तीफा देने की आवश्यकता नहीं होगी। कर्मचारियों की प्रथम ज्वाइनिंग तिथि से उनकी वरिष्ठता और सेवा की निरंतरता को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। इसके अलावा कर्मचारियों के खिलाफ शुरू की गई पूर्वाग्रहपूर्ण कार्रवाई पर भी प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद रोक लगा दी गई है।
समझौते में कर्मचारियों के बकाया वेतन और पीएफ भुगतान को लेकर भी प्रक्रिया तय की गई है। कर्मचारियों को अपने बकाया वेतन और पीएफ से संबंधित व्यक्तिगत विवरण तैयार कर प्रबंधन के पास जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। कर्मचारियों द्वारा विवरण सौंपे जाने के बाद प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर बकाया राशि का निपटारा करना होगा।
हालांकि कर्मचारियों की नियमितीकरण की मुख्य मांग अभी लंबित है। श्रम प्रशासन और प्रबंधन को सौंपे गए मांग पत्र पर चर्चा आगे भी जारी रहेगी। बारहमासी प्रकृति के कार्यों पर तैनात कर्मचारियों को ठेकेदारों के बजाय सीधे एमएमयू में नियमित करने की मांग को आगे अधिकरण के समक्ष भेजे जाने की बात कही गई है।
भारद्वाज ने कहा कि आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने अनुशासन और एकजुटता बनाए रखी। उन्होंने कर्मचारियों से भविष्य में भी अपने अधिकारों और मांगों को लेकर इसी तरह संगठित एवं शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।