शहर में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार कई क्षेत्रों में लोगों को सात-सात दिनों के अंतराल के बाद पानी की सप्लाई मिल रही है। इससे लोगों में भारी रोष है और जल शक्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सोलन शहर की प्रतिदिन पानी की आवश्यकता करीब 82 से 90 लाख गैलन है, जबकि जल शक्ति विभाग की ओर से नगर निगम को केवल 60 से 63 लाख गैलन पानी ही उपलब्ध करवाया जा रहा है। आवश्यकता के मुकाबले कम पानी मिलने से शहर के कई हिस्सों में पेयजल आपूर्ति का संकट बना हुआ है।
लोगों का आरोप है कि जल शक्ति विभाग हर मौसम में पानी की कमी के लिए अलग-अलग कारण बताता है। गर्मियों में जल स्रोतों में कमी का हवाला दिया जाता है, जबकि बरसात के दौरान गाद आने, मोटर खराब होने और पाइपलाइन फटने जैसी समस्याओं को कारण बताया जाता है। स्थानीय निवासियों ने सवाल उठाया कि मानसून के दौरान गाद की समस्या पहले से सामने आती रही है तो इससे निपटने के लिए स्थायी व्यवस्था और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता।
निवासियों ने स्पष्ट किया कि नगर निगम को जितना पानी जल शक्ति विभाग से प्राप्त होता है, वह उसी के अनुसार शहर में वितरित करता है। ऐसे में पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाने की मुख्य जिम्मेदारी जल शक्ति विभाग और सरकार की है।
लोगों ने चुने हुए प्रतिनिधियों और अधिकारियों से भी जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि पेयजल के साथ शहर की सड़कों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। कई स्थानों पर सड़कें खराब हैं और गड्ढों के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों ने सरकार से पेयजल संकट का तुरंत समाधान करने तथा नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
गौरतलब है कि पेयजल संकट के बीच नगर निगम सोलन ने हाल ही में बकाया पानी बिलों की वसूली को लेकर विशेष अभियान भी शुरू किया है। इससे पहले भी शहर में पाइप लीकेज और लापरवाही को लेकर सवाल उठ चुके हैं। शहरी जलापूर्ति मानकों की जानकारी के लिए जल जीवन मिशन की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।