जिले में तपेदिक (टीबी) के बढ़ते मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। विभाग का मुख्य जोर टीबी की जल्द पहचान, समय पर जांच और संक्रमित मरीजों को तुरंत उपचार उपलब्ध करवाने पर है। सोलन के एडिशनल हेल्थ ऑफिसर डॉ. योगेश गुप्ता ने बताया कि जिले में हर वर्ष करीब 2000 टीबी के मामले सामने आते हैं।
डॉ. गुप्ता के अनुसार टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने अथवा सांस लेने के दौरान हवा में मौजूद सूक्ष्म बूंदों के माध्यम से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकती है। टीबी से संक्रमित व्यक्ति के आसपास लंबे समय तक रहने वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में लक्षण सामने आने पर समय रहते जांच करवाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने बताया कि चालू वर्ष के पिछले छह से सात महीनों के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने सोलन जिले में करीब 1200 टीबी मरीजों की पहचान की है। इन सभी मरीजों का उपचार शुरू कर दिया गया है और उन्हें निर्धारित अवधि के अनुसार करीब छह महीने का दवाइयों का कोर्स करवाया जा रहा है।
जिले में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी के मामले भी सामने आ रहे हैं। डॉ. गुप्ता के अनुसार जनवरी से अब तक जिले में एमडीआर टीबी के 29 मामले सामने आए हैं। इन सभी मरीजों का उपचार स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में चल रहा है।
उन्होंने कहा कि टीबी संक्रामक बीमारी होने के कारण इसे पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास आवश्यक हैं। विभाग की कोशिश रहती है कि किसी व्यक्ति में टीबी के संभावित लक्षण नजर आने पर उसकी जल्द पहचान की जाए, आवश्यक जांच करवाई जाए और रिपोर्ट के आधार पर बिना देरी किए उपचार शुरू किया जाए।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना अथवा अन्य संबंधित लक्षण दिखाई देने पर इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत स्वास्थ्य संस्थान में जांच करवाएं। समय पर पहचान और पूरा उपचार टीबी पर नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। BITE – डॉ योगेश गुप्ता एडिशनल हेल्थ ऑफिसर सोलन
सोलन में हर साल सामने आते हैं टीबी के करीब 2000 मामले, स्वास्थ्य विभाग ने जांच और उपचार में तेजी पर दिया जोर