पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को लेकर हिमाचल टैक्सी यूनियन सोलन ने चिंता जताई है। यूनियन प्रधान कमल कुमार ने कहा कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से टैक्सियों की माइलेज, पिकअप और इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार कर टैक्सी चालकों को राहत देने की मांग की है।
कमल कुमार के अनुसार, पहले जो टैक्सियां 15 से 16 किलोमीटर प्रति लीटर तक माइलेज देती थीं, अब उनका औसत घटकर 12 से 13 किलोमीटर प्रति लीटर रह गया है। इससे चालकों का ईंधन खर्च बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में इसका असर अधिक दिखाई देता है और चढ़ाई के दौरान वाहनों की पिकअप भी प्रभावित हो रही है।
यूनियन प्रधान ने दावा किया कि एथनॉल मिश्रित ईंधन के कारण वाहनों के इंजन और कुछ पार्ट्स पर भी असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि पहले जो पार्ट्स लंबे समय तक चलते थे, अब उन्हें अपेक्षाकृत जल्दी बदलना पड़ रहा है। इससे टैक्सी चालकों का रखरखाव खर्च बढ़ रहा है और उनकी आमदनी पर असर पड़ रहा है
उन्होंने कहा कि टैक्सी चालक पहले ही ईंधन, मरम्मत और अन्य खर्चों के दबाव में हैं। ऐसे में महंगे प्रीमियम पेट्रोल का विकल्प सभी चालकों के लिए व्यावहारिक नहीं है। यदि ईंधन खर्च बढ़ता है तो उसका असर अंततः यात्रियों पर भी पड़ सकता है।
कमल कुमार ने सरकार से मांग की कि टैक्सी चालकों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और ईंधन नीति पर आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा विकल्प उपलब्ध करवाना चाहिए, जिससे वाहन मालिकों और आम यात्रियों दोनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
सोलन में एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के खिलाफ टैक्सी यूनियन मुखर, माइलेज घटने और इंजन खर्च बढ़ने का दावा