ऐतिहासिक शूलिनी मेले में जीव-जंतुओं के व्यावसायिक एवं प्रदर्शनात्मक उपयोग पर रोक लगाने की मांग को लेकर एहसास फाउंडेशन ने प्रशासन से हस्तक्षेप करने की अपील की है। संस्था की संस्थापक श्वेता ने बताया कि इस संबंध में एसडीएम सोलन को औपचारिक पत्र एवं ईमेल भेजा गया है।
उन्होंने कहा कि मेले के दौरान किसी भी प्रकार के वन्यजीव या अन्य जीव-जंतुओं का प्रदर्शन नहीं किया जाना चाहिए। पिछले वर्ष मेले में अजगर के प्रदर्शन की घटना को देखते हुए संस्था ने इस बार पहले ही प्रशासन को अवगत कराया है।
श्वेता ने बताया कि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शिकायत को वन्यजीव विभाग, वन विभाग और पशुपालन विभाग को भेज दिया है। संबंधित विभागों से संस्था को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है, जिसके लिए उन्होंने प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि किसी भी पक्षी या जानवर को कैद में रखना उचित नहीं है और बिना अनुमति वन्यजीवों को रखना कानूनन अपराध है। संस्था ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं सांपों या अन्य वन्यजीवों का अवैध प्रदर्शन अथवा पक्षियों की अवैध खरीद-फरोख्त होती दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस या संबंधित विभाग को दें।
एहसास फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि बेजुबान जीवों के संरक्षण और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संस्था आगे भी अपनी मुहिम जारी रखेगी।