जिला खनन अधिकारी (डीएमओ) एवं सहायक भूवैज्ञानिक दिनेश कुमार ने बताया कि सोलन जिले में खनन गतिविधियों से प्राप्त राजस्व को खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर खर्च किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि खदान संचालकों द्वारा डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) ट्रस्ट में प्रति टन ₹10 का अंशदान दिया जाता है, जिसका उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों और लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में उपायुक्त की अध्यक्षता में लगभग ₹24 करोड़ का बजट विभिन्न विकास कार्यों के लिए जारी किया गया है। इसमें पेयजल योजनाओं के लिए करीब ₹6 करोड़, बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों के लिए लगभग ₹10 करोड़ तथा शिक्षा क्षेत्र के लिए ₹3 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं के लिए करीब ₹1.5 करोड़, ऊर्जा एवं विकास कार्यों के लिए ₹1.64 करोड़, स्वच्छता के लिए ₹95 लाख और कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए लगभग ₹44 हजार की राशि जारी की गई है।
दिनेश कुमार ने कहा कि खनन गतिविधियां निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के तहत ही संचालित की जाती हैं। यदि किसी क्षेत्र में पर्यावरणीय क्षति की शिकायत सामने आती है तो विभाग प्राथमिकता के आधार पर सुधारात्मक कार्य करता है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खनन से प्राप्त आय का सीधा लाभ प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचे और वहां के लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।
सोलन: खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए ₹24 करोड़ जारी, पेयजल और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर