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22 जून 2012 को ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ फ़िल्म का पहला भाग रिलीज़ हुआ था. दर्शकों ने इसे इतना पसंद किया कि 8 अगस्त 2012 को इसका दूसरा भाग रिलीज किया गया था. ये फिल्म न सिर्फ एक बड़ी हिट साबित हुई बल्कि फैन्स का दिल जीतने में भी कामयाब रही. आपने अगर यह फिल्म देखी है तो आपको पता होगा कि गैंग्स ऑफ वासेपुर ने झारखंड के धनबाद जिले में होने वाली ‘गैंगवार’ की कहानी बताती है.
वासेपुर फिर से चर्चा में क्यों है?
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अपनी रिलीज के सालों बाद अब वासेपुर फिर से खबरों में है. क्योंकि इंटरपोल ने वासेपुर के नए गैंगस्टर प्रिंस खान के खिलाफ एक रेड और ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया है. पुलिस ने जो सूचना जुटाई है, उसके मुताबिक प्रिंस खान दुबई या शारजाह में छिपा है और वहीं से धनबाद कोयलांचल में गैंग ऑपरेट कर रहा है. धनबाद में फायरिंग के एक केस के सिलसिले में प्रिंस के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है, जबकि ब्लू कॉर्नर नोटिस उसके खिलाफ पुलिस के एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड की ओर से एक दूसरे केस में जारी हो चुका है.
वासेपुर का मोस्ट वांटेड प्रिंस खान कौन?
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रिंस कुछ महीने पहले हैदर अली के नाम पर फर्जी पासपोर्ट बनवाकर विदेश भाग गया था. विदेश भागने के बाद उसने वहां से अपना काम जारी रखा और अपने गुर्गों की मदद से धनबाद में हत्या, रंगदारी, फायरिंग के दो दर्जन से भी ज्यादा वारदात अंजाम दिए है. हाल में भी उसके गिरोह ने कई होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर गोलीबारी की थी.
फर्जी पासपोर्ट बनवाकर विदेश भागा
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बताया जाता है कि प्रिंस वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर फहीम खान के लिए काम करता था. फहीम खान जेल में है और वह इस गैंग की कमान संभालना चाहता था. इसी बात पर उसका फहीम खान से अलगाव हो गया और उसने अलग गैंग बना लिया. नवंबर 2021 में फहीम खान के करीबी माने जाने वाले महताब आलम उर्फ नन्हे की हत्या कर वो अपराध की दुनिया में आगे बढ़ा और क्रूर अपराधी बनता चला गया.
अपराध की दुनिया में कैसे आगे बढ़ा?
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धनबाद पुलिस को लंबे वक्त से प्रिंस की तलाश है. अब तक उसके गिरोह के 40 से अधिक गुर्गों को गिरफ्तार किया जा चुका है. ऐसे में अगर अब प्रिंस को पकड़ा जाता है तो पुलिस उसे प्रत्यर्पित कर झारखंड लाने की कोशिश करेगी और उसके आतंक को खत्म करेगी. धनबाद पुलिस के आग्रह पर सीबीआई ने प्रिंस खान की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण के लिए इंटरपोल से सहायता मांगी थी.