सोलन, आम जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है और अब सरकारी अस्पतालों में इलाज भी सस्ता नहीं रहा। कभी मुफ़्त या मामूली खर्च पर होने वाले टेस्ट अब पैसे देकर करवाने होंगे। इस फैसले से गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों की परेशानी और बढ़ गई है। लोग कह रहे हैं कि सरकार मुफ्त इलाज के बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन हकीकत में मरीजों की जेब पर लगातार बोझ डाला जा रहा है। आम जनता का कहना है कि सरकार को राहत देने की बजाय महंगे टेस्ट थोपने के बजाय गरीबों को सुविधाएं सुलभ बनानी चाहिए, क्योंकि सरकारी अस्पताल ही उनका सहारा हैं।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट राकेश पंवर के अनुसार, यह निर्णय 3 जुलाई को मंत्री की अध्यक्षता में हुई रोगी कल्याण समिति की बैठक में लिया गया था। नई व्यवस्था के तहत अल्ट्रासाउंड के लिए 130 रुपये और ईसीजी के लिए 30 रुपये शुल्क लिया जाएगा। यह दरें इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला के आधार पर तय की गई हैं। उन्होंने बताया कि दुर्घटना पीड़ितों, जननी सुरक्षा योजना के तहत आने वाले मरीजों और एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को इन शुल्कों से छूट दी जाएगी। वहीं, पर्ची बनाने के लिए किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
बाइट मेडिकल सुपरिटेंडेंट राकेश पंवर