सोलन।
राज्यस्तरीय शूलिनी मेले में भंडारा आयोजकों से ₹2000 शुल्क वसूलने के नगर निगम के निर्णय पर उठे जनविरोध के बाद, सोलन की नगर निगम कमिश्नर एकता काप्टा ने ऐसा संतुलित और दूरदर्शितापूर्ण निर्णय लिया है, जिसने भक्तों की भावनाओं को भी सम्मान दिया और प्रशासन की गरिमा को भी बनाए रखा।
कमिश्नर काप्टा ने घोषणा की कि अब भंडारा आयोजकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन उन्हें एक अंडरटेकिंग देनी होगी जिसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे कूड़े-कचरे को सेग्रिगेट कर एक स्थान पर इकट्ठा करेंगे और नगर निगम कर्मचारियों को सौंपेंगे। इस निर्णय से जहां भक्तों की आस्था को ठेस नहीं पहुंची, वहीं सफाई व्यवस्था पर भी समझौता नहीं हुआ।उन्होंने बताया कि एसडीएम के माध्यम से जो भी भंडारा लगाने के आवेदन आएंगे, उनमें यह अंडरटेकिंग अनिवार्य होगी। इस पहल से भंडारा आयोजकों में जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी और शूलिनी मेले की पवित्रता तथा सफाई भी बनी रहेगी।
सोलन निवासी अंकुश सूद , और अमन सेठी , समेत कई धार्मिक संगठनों ने कमिश्नर एकता काप्टा के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भक्तों की भावनाओं को समझने वाली प्रशासनिक सोच का उदाहरण है, जिसकी सराहना की जानी चाहिए।
byte सोलन निवासी अंकुश सूद , और अमन सेठी
लोगों ने कहा कि यह दुर्लभ होता है जब कोई प्रशासनिक अधिकारी जनता की भावना को समझते हुए निर्णय ले, और कमिश्नर एकता काप्टा ने यह करके दिखाया। उनका यह निर्णय आने वाले आयोजनों के लिए भी एक सकारात्मक दिशा तय करता है।