एपीएमसी सोलन के चेयरमैन रोशन ठाकुर ने सरकार की नई अधिसूचना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सोलन, कांगड़ा और ऊना जैसे सीमावर्ती जिलों की कृषि उपज मंडी समितियां लंबे समय से इस व्यवस्था को दोबारा लागू करने की मांग कर रही थीं। वर्ष 2014 से बाहरी राज्यों से सब्जियां लाकर खुले बाजार में कहीं भी बेचने की छूट थी, जिससे मंडी को राजस्व हानि हो रही थी और स्थानीय व्यापारियों को दरों में भारी अंतर के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा था। कई व्यापारी सीधे चंडीगढ़ जैसे शहरों से माल लाकर छोटे दुकानदारों को बेच देते थे, जिसका मंडी के पास कोई अभिलेख नहीं रहता था।चेयरमैन रोशन ठाकुर ने स्पष्ट किया कि अब बाहरी राज्यों से आने वाले माल की सीमाओं पर कड़ी जांच की जाएगी और यहां व्यापार करने के लिए मंडी समिति में पंजीकरण अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण खुले तौर पर माल बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस कदम से मंडी में पारदर्शिता आएगी और सब्जियों के दामों में अनियमितता पर रोक लगेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंडी द्वारा लिया जाने वाला एक प्रतिशत शुल्क केवल खरीददारों से लिया जाता है, किसानों से नहीं। नई व्यवस्था से किसी भी किसान पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा; उद्देश्य केवल व्यापार को नियमित कर स्थानीय मंडी व्यवस्था को मजबूत करना है।