सोलन नगर निगम की कार्यप्रणाली पर अब जनता का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। वार्ड नंबर 10 के एक स्थानीय नागरिक ने मूलभूत सुविधाओं की पोल खोलते हुए साफ कहा कि शहर में सड़कों, बिजली और कूड़ा उठाने की व्यवस्था भले ठीक हो, लेकिन पानी की किल्लत ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। आरोप है कि महीने में केवल 5 दिन पानी मिल रहा है, जबकि बदले में 1800 रुपये तक का भारी बिल थमाया जा रहा है। सवाल सीधा है—जब पानी ही नहीं मिल रहा, तो फिर इतना भारी शुल्क किस बात का? इससे साफ झलकता है कि व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामी है और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। नागरिक ने ड्रेनेज सिस्टम की बदहाल स्थिति को भी उजागर करते हुए कहा कि खराब नालियों के कारण सड़कों को नुकसान पहुंच रहा है और पूरे इलाके में दुर्गंध फैली रहती है। सबसे बड़ी चिंता नगर निगम और जल विभाग के बीच तालमेल की कमी को लेकर जताई गई है, जिसका खामियाजा सीधे जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से अक्षम अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग की है। आने वाले समय में नए पार्षदों से लोगों को उम्मीद जरूर है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या हालात सच में बदलेंगे या फिर जनता को इसी ‘पानी के संकट और भारी बिल’ के चक्रव्यूह में फंसा रहना पड़ेगा।